गाय व भैंस मे मद से जुडी कुछ बातें।
मद की प्रारम्भिक अवस्था:
(1) पशु की भूख में कमी आना |
(2) दूध उत्पादन में कमी|
(3) पशु का रम्भावना (बोलना)व बेचैन रहना |
(4) योनि से पतले श्लैष्मिक पदार्थ का निकलना |
(5) दूसरे पशुओं से अलग रहना|
(6) पशु का पूंछ उठाना|
(7) योनि द्वार (भग) का सूजना तथा बार-बार पेशाब करना |
(8) शरीर के तापमान में मामूली सी वृद्धि|
मद की मध्यव्स्था:
गर्मीं की यह अवस्था बहुत महवपूर्ण होती है क्योंकि कृत्रिम ग्रंह धान के लिए यही अवस्था सबसे उपयुक्त मानी जाती है |
इसकी अवधि लगभग 10 घटे तक रहती है |
इस अवस्था में पशु काफी उत्तेजित दीखता है तथा वह अन्य पशुओं में रूचि दिखता है |
यह अवस्था निम्नलिखित लक्षणों से पहचानी जा सकती है |
(1) योनि द्वार (भग) से निकलने वाले श्लैष्मिक पदार्थ का गढा होना जिससे वह बिना टूटे नीचे तक लटकता हुआ दिखाई देता है |
(2) पशु ज़ोर-ज़ोर से रम्भावना (बोलने) लगता हैं |
(3) भग (योनि द्वार)की सूजन तथा श्लैष्मिक झिल्ली की लाली में वृद्धि हो जाती है |
(4) शरीर का तापमान बढ़ जाता हैं |
(5) दूध में कमी तथा पीठ पर टेढ़ापन दिखाई देता है |
(6) पशु अपने ऊपर दूसरे पशु को चढने देता हैं अथवा वह खुद दूसरे पशुओं पे चढने लगता |
मद की अन्तिम अवस्था:
(1) पशु की भूख लगभग सामान्य हो जाती है |
(2) दूध में कमी भी समाप्त हो जाती है |
(3) पशु का रम्भाना कम हो जाता हैं |
(4) भग की सूजन व श्लैष्मिक झिल्ली की लाली में कमी आ जाती है |
(5) श्लेष्मा का निकलना या तो बन्द या फिर बहुत कम हो जाता है तथा यह बहुत गाढ़ा व कुछ अपारदर्शी होने लगता है |
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