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Sunday, October 14, 2018

जैविक कीटनाशकों से लाभ



जैविक कीटनाशकों से लाभ
 
1) जीवों एवं वनस्पतियों पर आधारित उत्पाद होने के कारण, जैविक कीटनाशक लगभग एक माह में भूमि में मिलकर अपघटित हो जाते है तथा इनका कोई भी अंश अवशेष नही रहता | यही कारण है इन्हें परिस्तिथतकीय मित्र के रूप में जाना जाता है |
 
2) जैविक कीटनाशक केवल लक्षित कीटों एवं बिमारियों को मारते है जब की कीटनाशक से मित्र कीट भी नष्ट हो जाते है |
 
3) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों/व्याधियों में सहनशीलता एवं प्रतिरोध नही उत्पन्न होता जबकि अनेक रसायन कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों में प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न होती जा रही है जिनके कारण उनका प्रयोग अनुपयोगी होता जा रहा है |
 
4) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों के जैविक स्वभाव में कोई परिवर्तन नही होता जबकि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से ऐसे लक्षण परिलक्षित हुए है | सफ़ेद मक्खी अब अनेक फसलों तथा चने का छेदक अब कई अन्य फसलों को भी नुकसान पहुँचाने लगा है |
 
5) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग के तुरंत बाद फलियों, फलों, सब्जियों की कटाई कर प्रयोग में लाया जा सकता है जबकि रासायिनक कीटनाशकों के अवशिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए कुछ दिनों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है |

6) विक कीटनाशकों के सुरक्षित, हानिरहित तथा परिस्तिथतकीय मित्र होने के कारण विश्व में इनके प्रयोग से उत्पादित चाय, कपास, फल, सब्जियां, तम्बाकू तथा खद्ध्यानो, दलहन एवं तिलहन की मांग एवं मूल्यों में वृद्धि हो रही है, जिसका परिणाम यह है की कृषकों को उनके उत्पादों का अधिक मूल्य मिल रहा है |
 
7) कीटनाशकों के विषहीन एवं हानिरहित होने के कारण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इनके प्रयोग से आत्महत्या की सम्भावना शून्य हो गयी है जबकि कीटनाशी रसायनों से अनेक आत्म हत्यांए हो रही है |
 
8 कीटनाशक पर्यावरण, मनुष्य एवं पशुओं के लिए सुरक्षित तथा हानिरहित है | इनके प्रयोग से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है जो पर्यावरण एवं परिस्तिथतकीय का संतुलन बनाये रखने में सहायक है |

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण



पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण

पौधे जडो द्वारा भूमि से पानी एवं पोषक तत्व, वायु से कार्वन डाई आक्साइड तथा सूर्य से प्रकाश ऊर्जा लेकर अपने विभिन्न भागों का निर्माण करते है।
पोषक तत्वों को पौधों की आवश्यकतानुसार निम्न प्रकार वर्गीकृत किया गया है।

मुख्य पोषक तत्व-
नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश।

गौण पोषक तत्व-
कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं गन्धक।

सूक्ष्म पोषक तत्व-
लोहा, जिंक, कापर, मैग्नीज, मालिब्डेनम, बोरान एवं क्लोरीन.


🌱पौधों में आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके कार्य

1) पौधों के सामान्य विकास एवं वृद्धि हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भरपूर फसल नहीं मिलती ।

2 कार्बन , हाइड्रोजन व आक्सीजन को पौधे हवा एवं जल से प्राप्त करते है।

3) नाइट्रोजन , फस्फोरस एवं पोटैशियम को पौधे मिट्टी से प्राप्त करते है। इनकी पौधों को काफी मात्रा में जरूरत रहती है। इन्हे प्रमुख पोषक तत्व कहते है।

4) कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं गन्धक को पौधे कम मात्रा में ग्रहण करते है। इन्हे गौड अथवा द्वितीयक पोषक तत्व कहते है।

5) लोहा, जस्ता, मैगनीज, तांबा, बोरोन, मोलिब्डेनम और क्लोरीन तत्वों की पौधों को काफी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। इन्हे सूक्ष्म पोषक तत्व कहते है।
पोषक तत्वों के कार्य

🌱नाइट्रोजन
👉 सभी जीवित ऊतकों यानि जड़, तना, पत्ति की वृद्दि और विकास में सहायक है।
👉 क्लोरोफिल, प्रोटोप्लाज्मा प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों का एक महत्वपूर्ण अवयव है।
👉 पत्ती वाली सब्जियों और चारे की गुणवत्ता में सुधार करता है।

🌱 फास्फोरस
👉 पौधों के वर्धनशील अग्रभाग, बीज और फलों के विकास हेतु आवश्यक है। पुष्प विकास में सहायक है।
👉 कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है। जड़ों के विकास में सहायक होता है।
👉 न्यूक्लिक अम्लों, प्रोटीन, फास्फोलिपिड और सहविकारों का अवयव है।
👉 अमीनों अम्लों का अवयव है।

🌱पोटेशियम
👉 एंजाइमों की क्रियाशीलता बढाता है।
ठण्डे और बादलयुक्त मौसम में पौधों द्वारा प्रकाश के उपयोग में वृद्धि करता है, जिससे पौधों में ठण्डक और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
👉 कार्बोहाइड्रेट के स्थानांतरण, प्रोटीन संश्लेषण और इनकी स्थिरता बनाये रखने में मदद करता है।
👉 पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि होती है।
👉 इसके उपयोग से दाने आकार में बड़े हो जाते है और फलों और सब्जियों की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

🌱 कैल्शियम
👉 कोशिका भित्ति का एक प्रमुख अवयव है, जो कि सामान्य कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक होता है।
👉 कोशिका झिल्ली की स्थिरता बनाये रखने में सहायक होता है।
👉 एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
👉 पौधों में जैविक अम्लों को उदासीन बनाकर उनके विषाक्त प्रभाव को समाप्त करता है।
👉 कार्बोहाइट्रेड के स्थानांतरण में मदद करता है।

🌱मैग्नीशियम
👉 क्लोरोफिल का प्रमुख तत्व है, जिसके बिना प्रकाश संश्लेषण (भोजन निर्माण) संभव नहीं है।
👉 कार्बोहाइट्रेड-उपापचय, न्यूक्लिक अम्लों के संश्लेषण आदि में भाग लेने वाले अनेक एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
👉 फास्फोरस के अवशोषण और स्थानांतरण में वृद्दि करता है।

🌱गंधक
👉 प्रोटीन संरचना को स्थिर रखने में सहायता करता है।
👉 तेल संश्लेषण और क्लोरोफिल निर्माण में मदद करता है।
👉 विटामिन के उपापचय क्रिया में योगदान करता है।

🌱जस्ता
👉 पौधों द्वारा फास्फोरस और नाइट्रोजन के उपयोग में सहायक होता है
👉 न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन-संश्लेषण में मदद करता है।
👉 हार्मोनों के जैव संश्लेषण में योगदान करता है।
👉 अनेक प्रकार के खनिज एंजाइमों का आवश्यक अंग है।

🌱तांबा
👉 पौधों में विटामिन ‘ए’ के निर्माण में वृद्दि करता है।
👉 अनेक एंजाइमों का घटक है।

🌱लोहा
👉 पौधों में क्लोरोफिल के संश्लेषण और रख रखाव के लिए आवश्यक होता है।
👉 न्यूक्लिक अम्ल के उपापचय में एक आवश्यक भूमिका निभाता है।
👉 अनेक एंजाइमों का आवश्यक अवयव है।

🌱मैगनीज
👉 प्रकाश और अन्धेरे की अवस्था में पादप कोशिकाओं में होने वाली क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
👉 नाइट्रोजन के उपापचय और क्लोरोफिल के संश्लेषण में भाग लेने वाले एंजाइमों की क्रियाशीलता बढ़ा देता है।
👉 पौधों में होने वाली अनेक महत्वपूर्ण एंजाइमयुक्त और कोशिकीय प्रतिक्रियओं के संचालन में सहायक है।
👉 कार्बोहाइट्रेड के आक्सीकरण के फलस्वरूप कार्बन आक्साइड और जल का निर्माण करता है।

🌱बोरोन
👉 प्रोटीन-संश्लेषण के लिये आवश्यक है।
👉 कोशिका –विभाजन को प्रभावित करता है।
👉 कैल्शियम के अवशोषण और पौधों द्वारा उसके उपयोग को प्रभावित करता है।
👉 कोशिका झिल्ली की पारगम्यता बढ़ाता है

Wednesday, September 26, 2018

जैविक कीटनाशक👇👇


रासायनिक कीटनाशकों के कृषि, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विरोधी परिणामों को देखते हुए अब ऐसे वैकल्पिक कीटनाशकों के अनुसंधान पर जोर दिया जाने लगा है, जो

🌱मनुष्य एवं मानवेतर जीवों के लिए अल्प या शून्य हानिकारक तथा सुरक्षित हों

🌱जिसके जैवकीय विघटन होने से मिट्टी, जल एवं वायु दूषित न हों।

🌱जिससे प्रतिकूल कीड़े ही मारे जा सकें, अनुकूल कीड़े नहीं ।

🌱जो लक्षित कीटों की प्रतिरोधी क्षमता विकसित न होने दे ।

🌱जो रासायनिक कीटनाशकों की अपेक्षा सस्ता, सहज प्राप्य एवं पार्श्व प्रभाव रहित हो ।

🌱जिनका प्रभाव भले ही रासायनिक कीटनाशकों की तरह न हो, धीमी ही हो और कीटों द्वारा कुछ नुकसान भी उठाना पड़े, किन्तु खाद्यान्न, मिट्टी, जल, वायु एवं जीवन में विषाक्तता का प्रवेश न हो। इन अपेक्षाओं की पूर्ति सिर्फ वनस्पति जगत से ही हो सकती है और विकल्प की तलाश में 'नीम' एक सर्वोत्तम कीटनाशक रूप में सामने आया है।

भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों, मुख्यत: जर्मनी, अमेरिका एवं जापान में विगत ३०-४० वर्षों के दौरान नीम वृक्ष के कीटनाशक तत्वों की खोज के लिए बड़े पैमाने पर सघन अनुसंधान हुए हैं और पाया गया है कि इस वृक्ष के फल, बीज, गिरी तथा डाल, तना एवं जड़ की छाल में कीट-विरोधी कई गुण मौजूद हैं। यह एक ही साथ कीट-भरण प्रतिरोधक (antifeedant), कीटनाशी (Insecticidal), कीट-वृद्धि विघटक (Insect-growth disrupting), गोल-कृमि प्रतिरोधी (Nematicidal), कवक/फफुंदनाशी (Fungicidal), जीवाणुनाशी (Bactericidal), कीट/वायरस/बैक्टेरिया विकर्षक (Insect/Virus/Bacteria-repellent) और कीटों के विरुद्ध बन्ध्यीकरण (Sterilizing) गुण वाला है। वैज्ञानिकों का अभिमत है कि प्रकृति-प्रदत्त नीम वृक्ष कीटनाशक (एवं उर्वरक रूप में भी) बेमिसाल है और इसे व्यापक पैमाने पर उपयोग में लाया जा सकता है।