Tuesday, October 30, 2018

( Wheat ) गेहूं , महत्वपूर्ण जानकारी


Wheat ( गेंहू)

1) वानस्पतिक नाम - ट्रिटिकम एस्टिवम
2) कुल - पोएसी
3) अधिक उत्पादन करने वाला राज्य है - यूपी
4) ज्यादा उत्पादित देश है - चीन, भारत
5) बौनी प्रजाति के जनक है - डा. नार्मल ई बोरलॉग थे।
6) विश्व में लगभग 24 करोड़ हे. भूमि पर गेहू की खेती होती है।
7) विश्व में लगभग उत्पादन - 65 करोड़ टन।
8) यूपी के अलीगढ़ जिले में सबसे ज्यादा गेहू उत्पादित होता हैं।
9) इसकी खेती के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम होती हैं।
10) यह शीतोष्ण जलवायु की फसल है।
11) इसकी बुआई के समय तपमान - 20 - 25℃ उपयुक्त रहता हैं।
12) बुआई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 से 18 सेमि.
13) बुआई के समय मृदा तापमान 20℃ से कम 35℃ अधिक नही होना चाहिए।
14) इसकी बुआई लगभग 15 से 30 नवम्बर तक कर देनी चाहिए।

15) बीज की मात्रा -
⚫ हल के पीछे- 90-100 kg/h
⚫सिड्रिल - 80 -100 kg/h
⚫डिबलर - 25 - 30 kg/h

16) गेहू बीज शोध करने की दवा - ट्राइकोडर्मा, विरडी, सियुडोमोन्स, फ्लोरोसेन्स+बाविस्टिन है।

17) उर्वरक -
⚫देशी प्रजाति में - NPK 60,30,30 KG/H
⚫बौनी प्रजाति में - NPK 120,60,40 kg/h

18) दीमक से बचाव - 25kg 5% एल्ड्रिन धूल/है ।
19) इसकी बुआई 4,5 सेमी की गहराई पर करनी चाहिए।

20) सिंचाई
⚫ पहली -  21 - 25 दिन में
⚫ दूसरा -  40-45 दिन के बाद
⚫ तीसरा - 65-70 दिन के बाद
⚫ चौथा -  90-95 दिन के बाद
⚫ पांचवा जरूरत पड़ने पर.

21) चूहे के नियंत्रण हेतु जिंक फॉस्फाइड का प्रयोग करते है।
22) इसकी फसल में गेरुई,कंडुआ,बाँट रोग,सेंहू रोग का प्रकोप होता है।

Thursday, October 25, 2018

जहरीली खेती से फैल रही हैं बीमारियां ।


आज की कृषि पूर्ण रूप से जहरीली हो चुकी है। अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग एक तरफ भूमि की उर्वरकता को नष्ट कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उपभोक्ता पैसे देकर जहर खरीद रहा है। जानलेवा बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, कैंसर, दस्त, उल्टियां, अपच कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग का ही नतीजा है। एक तरफ आज की युवा पीढ़ी कृषि से अपना मुंह मोड़ रही है, वहीं औद्योगिकीकरण, विकासशील गतिविधियों तथा बढ़ती जनसंख्या भूमि को सिकोड़ रही है। ऐसी परिस्थिति में जिस बची-खुची भूमि पर खेती हो रही है, वह पूर्ण रूप से विषैली हो चुकी है। कभी मौसम की मार, कभी बीज व अन्य कृषि उपकरणों के अभाव से किसान पिसता रहता है।
ऐसे में कृषि व्यवस्था को अपनाना घाटे का सौदा बन गया है। यही कारण है कि युवा पीढ़ी कृषि से हट कर महज चंद रुपए के लिए नौकरी करने को मजबूर हो गई है। गर्त में जाती कृषि व्यवस्था को बचाने का एकमात्र उपाय जीरो बजट आर्गेनिक खेती ही हो सकती है। जैविक खेती बिना कोई धन खर्च करके की जा सकती है। किसानों को देशी गउओं के गोबर और गोमूत्र का प्रयोग कीटनाशकों और खाद के रूप में करके, महंगे व हानिकारक कीटनाशकों पर पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। गोमूत्र में जहरीले पौधे खासकर नीम का प्रयोग करके फसलों की गुणवत्ता को बरकरार रखा जा सकता है।

Tuesday, October 16, 2018

डबिंग ( जागृति फिल्म )

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डबिंग ( जागृति फिल्म )
 
आओ बच्चो तुम्हे दिखाये हरियाली इस गाँव की,
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम।। 4
 
धूप छाव ये कुछ ना देखे इनके कर्म महान है,
सबका ये है भूख मिटाते इनपर तो अभिमान है,
देखो धरती माँ है अपनी नदियां गंगा घाट है,
हरी भरी हैं खेती देखों यहा मौज की ठाठ है,

विनम्र निवेदन करते है बात नही अभिमान की,
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम।। 4
 
हमको इज्जत प्यारी है रहते नही उधारों पे,
हमने सारा जीवन काटा धोती और रूमालों पे,
जन जीवन है सभी पले कृषि कर्म प्रधानों पे,
कड़ी धूप की क्या औकात चलते हैं अंगारो पे,
डट जाते है सीना ताने बात आये जब शान की,
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम ।। 4
 
मन में लेके नई उमंग बीज फसल की बोते है,
कई महीनो बाद ही जाके दाना पैदा होते है,
अपने सारे जीवन को संघर्षो पे तोला है,
रहे सलामत दुनिया सबकी सच्चे दिल से बोला है,
चैन सुकून सब उड़ जाता हैं खेती नही आसान की,
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम ।। 4
 
प्रेम भाव से सभी मनाते दीवाली और होलियां,
एक साथ में चलती अपनी ख़ुशी ख़ुशी टोलियां,
संस्कार से ओतप्रोत है गांव गांव की गोरियां,
बच्चा बच्चा बोल रहा है कृषिक्रांति की बोलियां,
पगड़ी ऊँचा रहे हमेशा आन बान और शान की
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम।। 4
 
जैविक खेती अपनाते हैं खेत खेत हरियाली है,
घर आँगन में जा के देखो झूम रही ख़ुशहाली है,
कोई किसी का वैर नहीं हर मौसम दीवाली है,
बोले पपीहा पीहू पीहू बारिस होने वाली है,
धन धान्य कटने से पहले नमन करो खलिहान की
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम।। 4
 
आओ बच्चो तुम्हे दिखाये हरियाली इस गाँव की,
हरियाली जो देख रहे हो मेहनत है किसान की।
किसान है हम….. किसान है हम।। 4

Sunday, October 14, 2018

जैविक कीटनाशकों से लाभ



जैविक कीटनाशकों से लाभ
 
1) जीवों एवं वनस्पतियों पर आधारित उत्पाद होने के कारण, जैविक कीटनाशक लगभग एक माह में भूमि में मिलकर अपघटित हो जाते है तथा इनका कोई भी अंश अवशेष नही रहता | यही कारण है इन्हें परिस्तिथतकीय मित्र के रूप में जाना जाता है |
 
2) जैविक कीटनाशक केवल लक्षित कीटों एवं बिमारियों को मारते है जब की कीटनाशक से मित्र कीट भी नष्ट हो जाते है |
 
3) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों/व्याधियों में सहनशीलता एवं प्रतिरोध नही उत्पन्न होता जबकि अनेक रसायन कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों में प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न होती जा रही है जिनके कारण उनका प्रयोग अनुपयोगी होता जा रहा है |
 
4) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों के जैविक स्वभाव में कोई परिवर्तन नही होता जबकि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से ऐसे लक्षण परिलक्षित हुए है | सफ़ेद मक्खी अब अनेक फसलों तथा चने का छेदक अब कई अन्य फसलों को भी नुकसान पहुँचाने लगा है |
 
5) जैविक कीटनाशकों के प्रयोग के तुरंत बाद फलियों, फलों, सब्जियों की कटाई कर प्रयोग में लाया जा सकता है जबकि रासायिनक कीटनाशकों के अवशिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए कुछ दिनों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है |

6) विक कीटनाशकों के सुरक्षित, हानिरहित तथा परिस्तिथतकीय मित्र होने के कारण विश्व में इनके प्रयोग से उत्पादित चाय, कपास, फल, सब्जियां, तम्बाकू तथा खद्ध्यानो, दलहन एवं तिलहन की मांग एवं मूल्यों में वृद्धि हो रही है, जिसका परिणाम यह है की कृषकों को उनके उत्पादों का अधिक मूल्य मिल रहा है |
 
7) कीटनाशकों के विषहीन एवं हानिरहित होने के कारण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इनके प्रयोग से आत्महत्या की सम्भावना शून्य हो गयी है जबकि कीटनाशी रसायनों से अनेक आत्म हत्यांए हो रही है |
 
8 कीटनाशक पर्यावरण, मनुष्य एवं पशुओं के लिए सुरक्षित तथा हानिरहित है | इनके प्रयोग से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है जो पर्यावरण एवं परिस्तिथतकीय का संतुलन बनाये रखने में सहायक है |

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण



पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण

पौधे जडो द्वारा भूमि से पानी एवं पोषक तत्व, वायु से कार्वन डाई आक्साइड तथा सूर्य से प्रकाश ऊर्जा लेकर अपने विभिन्न भागों का निर्माण करते है।
पोषक तत्वों को पौधों की आवश्यकतानुसार निम्न प्रकार वर्गीकृत किया गया है।

मुख्य पोषक तत्व-
नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश।

गौण पोषक तत्व-
कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं गन्धक।

सूक्ष्म पोषक तत्व-
लोहा, जिंक, कापर, मैग्नीज, मालिब्डेनम, बोरान एवं क्लोरीन.


🌱पौधों में आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके कार्य

1) पौधों के सामान्य विकास एवं वृद्धि हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भरपूर फसल नहीं मिलती ।

2 कार्बन , हाइड्रोजन व आक्सीजन को पौधे हवा एवं जल से प्राप्त करते है।

3) नाइट्रोजन , फस्फोरस एवं पोटैशियम को पौधे मिट्टी से प्राप्त करते है। इनकी पौधों को काफी मात्रा में जरूरत रहती है। इन्हे प्रमुख पोषक तत्व कहते है।

4) कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं गन्धक को पौधे कम मात्रा में ग्रहण करते है। इन्हे गौड अथवा द्वितीयक पोषक तत्व कहते है।

5) लोहा, जस्ता, मैगनीज, तांबा, बोरोन, मोलिब्डेनम और क्लोरीन तत्वों की पौधों को काफी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। इन्हे सूक्ष्म पोषक तत्व कहते है।
पोषक तत्वों के कार्य

🌱नाइट्रोजन
👉 सभी जीवित ऊतकों यानि जड़, तना, पत्ति की वृद्दि और विकास में सहायक है।
👉 क्लोरोफिल, प्रोटोप्लाज्मा प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों का एक महत्वपूर्ण अवयव है।
👉 पत्ती वाली सब्जियों और चारे की गुणवत्ता में सुधार करता है।

🌱 फास्फोरस
👉 पौधों के वर्धनशील अग्रभाग, बीज और फलों के विकास हेतु आवश्यक है। पुष्प विकास में सहायक है।
👉 कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है। जड़ों के विकास में सहायक होता है।
👉 न्यूक्लिक अम्लों, प्रोटीन, फास्फोलिपिड और सहविकारों का अवयव है।
👉 अमीनों अम्लों का अवयव है।

🌱पोटेशियम
👉 एंजाइमों की क्रियाशीलता बढाता है।
ठण्डे और बादलयुक्त मौसम में पौधों द्वारा प्रकाश के उपयोग में वृद्धि करता है, जिससे पौधों में ठण्डक और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
👉 कार्बोहाइड्रेट के स्थानांतरण, प्रोटीन संश्लेषण और इनकी स्थिरता बनाये रखने में मदद करता है।
👉 पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि होती है।
👉 इसके उपयोग से दाने आकार में बड़े हो जाते है और फलों और सब्जियों की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

🌱 कैल्शियम
👉 कोशिका भित्ति का एक प्रमुख अवयव है, जो कि सामान्य कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक होता है।
👉 कोशिका झिल्ली की स्थिरता बनाये रखने में सहायक होता है।
👉 एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
👉 पौधों में जैविक अम्लों को उदासीन बनाकर उनके विषाक्त प्रभाव को समाप्त करता है।
👉 कार्बोहाइट्रेड के स्थानांतरण में मदद करता है।

🌱मैग्नीशियम
👉 क्लोरोफिल का प्रमुख तत्व है, जिसके बिना प्रकाश संश्लेषण (भोजन निर्माण) संभव नहीं है।
👉 कार्बोहाइट्रेड-उपापचय, न्यूक्लिक अम्लों के संश्लेषण आदि में भाग लेने वाले अनेक एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
👉 फास्फोरस के अवशोषण और स्थानांतरण में वृद्दि करता है।

🌱गंधक
👉 प्रोटीन संरचना को स्थिर रखने में सहायता करता है।
👉 तेल संश्लेषण और क्लोरोफिल निर्माण में मदद करता है।
👉 विटामिन के उपापचय क्रिया में योगदान करता है।

🌱जस्ता
👉 पौधों द्वारा फास्फोरस और नाइट्रोजन के उपयोग में सहायक होता है
👉 न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन-संश्लेषण में मदद करता है।
👉 हार्मोनों के जैव संश्लेषण में योगदान करता है।
👉 अनेक प्रकार के खनिज एंजाइमों का आवश्यक अंग है।

🌱तांबा
👉 पौधों में विटामिन ‘ए’ के निर्माण में वृद्दि करता है।
👉 अनेक एंजाइमों का घटक है।

🌱लोहा
👉 पौधों में क्लोरोफिल के संश्लेषण और रख रखाव के लिए आवश्यक होता है।
👉 न्यूक्लिक अम्ल के उपापचय में एक आवश्यक भूमिका निभाता है।
👉 अनेक एंजाइमों का आवश्यक अवयव है।

🌱मैगनीज
👉 प्रकाश और अन्धेरे की अवस्था में पादप कोशिकाओं में होने वाली क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
👉 नाइट्रोजन के उपापचय और क्लोरोफिल के संश्लेषण में भाग लेने वाले एंजाइमों की क्रियाशीलता बढ़ा देता है।
👉 पौधों में होने वाली अनेक महत्वपूर्ण एंजाइमयुक्त और कोशिकीय प्रतिक्रियओं के संचालन में सहायक है।
👉 कार्बोहाइट्रेड के आक्सीकरण के फलस्वरूप कार्बन आक्साइड और जल का निर्माण करता है।

🌱बोरोन
👉 प्रोटीन-संश्लेषण के लिये आवश्यक है।
👉 कोशिका –विभाजन को प्रभावित करता है।
👉 कैल्शियम के अवशोषण और पौधों द्वारा उसके उपयोग को प्रभावित करता है।
👉 कोशिका झिल्ली की पारगम्यता बढ़ाता है

Thursday, October 11, 2018

आईएसआई निर्धारित पशु आहार के मानक


आईएसआई निर्धारित पशु आहार के मानक
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क्रम सं       %मात्रा                    अवयव 
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1)             20-21                  प्रोटीन
2)             2.5-3                   चिकनाई
3)             1.00                    कैल्शियम
4)             0.5                      फास्फोरस
5)             4. 00                   सेड सिलिका
6)             12.00                  फाइबर
7)             3.00                    खनिज लवण
8)             5000 IU/KG      विटामिन ए /डी
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बछड़े की देख भाल करना


✍शुरुआती देखभाल
1) जन्म के ठीक बाद बछड़े के नाक और मुंह से कफ अथवा श्लेष्मा इत्यादि को साफ करें।

2) आमतौर पर गाय बछड़े को जन्म देते ही उसे जीभ से चाटने लगती है। इससे बछड़े के शरीर को सूखने में आसानी होती है और श्वसन तथा रक्त संचार सुचारू होता है। यदि गाय बछड़े को न चाटे अथवा ठंडी जलवायु की स्थिति में बछड़े के शरीर को सूखे कपड़े या टाट से पोंछकर सुखाएं। हाथ से छाती को दबाकर और छोड़कर कृत्रिम श्वसन प्रदान करें।

3) नाभ नाल में शरीर से 2-5 सेमी की दूरी पर गांठ बांध देनी चाहिए और बांधे हुए स्थान से 1 सेमी नीचे से काट कर टिंक्चर आयोडीन या बोरिक एसिड अथवा कोई भी अन्य एंटिबायोटिक लगाना चाहिए।

4) बाड़े के गीले बिछौने को हटाकर स्थान को बिल्कुल साफ और सूखा रखना चाहिए।

5) बछड़े के वजन का ब्योरा रखना चाहिए।

6) गाय के थन और स्तनाग्र को क्लोरीन के घोल द्वारा अच्छी तरह साफ कर सुखाएं।

7) बछड़े को मां का पहला दूध अर्थात् खीस का पान करने दें।

8) बछड़ा एक घंटे में खड़े होकर दूध पीने की कोशिश करने लगता है। यदि ऐसा न हो तो कमजोर बछड़े की मदद करें।

✍पानी का महत्व
ध्यान रखें हर वक्त साफ और ताजा पानी उपलब्ध रहे। बछड़े को जरूरत से ज्यादा पानी एक ही बार में पीने से रोकने के लिए पानी को अलग-अलग बरतनों में और अलग-अलग स्थानों में रखें।

✍खिलाने की व्यवस्था
बछड़े को खिलाने की व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस प्रकार का भोज्य पदार्थ दिया जा रहा है। इसके लिए आमतौर पर निम्नलिखित व्यवस्था अपनाई जाती है:

१) बछड़े को पूरी तरह दूध पर पालना
२) मक्खन निकाला हुआ दूध देना
३) दूध की बजाए अन्य द्रव पदार्थ जैसे ताजा #छाछ, @दही का मीठा @पानी, @दलिया इत्यादि देना
४) दूध के विकल्प देना
काफ स्टार्टर देना
५) पोषक गाय का दूध पिलाना।

✍पूरी तरह दूध पर पालना
50 किलो औसत शारीरिक वजन के साथ तीन महीने की उम्र तक के नवजात बछड़े की पोषण आवश्यकता इस प्रकार है:

⚫सूखा पदार्थ
(डीएम). 1.43 किग्रा
⚫पचने योग्य कुल पोषक पदार्थ (टीडीएन)               1.60 किग्रा
⚫कच्चे प्रोटीन 315 ग्राम

१) यह ध्यान देने योग्य है कि टीडीएन की आवश्यकता डीएम से अधिक होती है क्योंकि भोजन में वसा का उच्च अनुपात होना चाहिए। 15 दिनों बाद बछड़ा घास टूंगना शुरू कर देता है जिसकी मात्रा लगभग आधा किलो प्रतिदिन होती है जो 3 महीने बाद बढ़कर 5 किलो हो जाती है।

२) इस दौरान हरे चारे के स्थान पर 1-2 किलो अच्छे प्रकार का सूखा चारा (पुआल) बछड़े का आहार हो सकता है जो 15 दिन की उम्र में आधा किलो से लेकर

३) 3 महीने की उम्र में डेढ किलो तक दिया जा सकता है। 3 सप्ताह के बाद यदि संपूर्ण दूध की उपलब्धता कम हो तो बछड़े को मक्खन निकाला हुआ दूध, छाछ अथवा अन्य दुग्धीय तरल पदार्थ दिया जा सकता है।

✍ मिश्रित आहार
१) बछड़े का मिश्रित आहार एक सांद्र पूरक आहार है जो ऐसे बछड़े को दिया जाता है जिसे दूध अथवा अन्य तरल पदार्थों पर पाला जा रहा हो। बछड़े का मिश्रित आहार मुख्य रूप से मक्के और जई जैसे अनाजों से बना होता है।

२) जौ, गेहूं और ज्वार जैसे अनाजों का इस्तेमाल भी इस मिश्रण में किया जा सकता है। बछड़े के मिश्रित आहर में 10% तक गुड़ का इस्तेमाल किया जा सकता है।

३) एक आदर्श मिश्रित आहार में 80% टीडीएन और 22% सीपी होता है।

✍ रेशेदार पदार्थ
१) अच्छे किस्म के तनायुक्त पत्तेदार सूखे दलहनी पौधे छोटे बछड़े के लिए रेशे का अच्छा स्रोत हैं। दलहन, घास और पुआल का मिश्रण भी उपयुक्त होता है।

२) धूप लगाई हुई घास जिसकी हरियाली बरकरार हो, विटामिन-ए, डी तथा बी-कॉम्प्लैक्स विटामिनों का अच्छा स्रोत होती है।

३) 6 महीने की उम्र में बछड़ा 1.5 से 2.5 किग्रा तक सूखी घास खा सकता है। उम्र बढने के साथ-साथ यह मात्रा बढ़ती जाती है।

४) 6-8 सप्ताह के बाद से थोड़ी मात्रा में साइलेज़ अतिरिक्त रूप से दिया जा सकता है। अधिक छोटी उम्र से साइलेज़ खिलाना बछड़े में दस्त का कारण बन सकता है।

५) बछड़े के 4 से 6 महीने की उम्र के हो जाने से पहले तक साइलेज़ को रेशे के स्रोत के रूप में उसके लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

६) मक्के और ज्वार के साइलेज़ में प्रोटीन और कैल्शियम पर्याप्त नहीं होते हैं तथा उनमें विटामिन डी की मात्रा भी कम होती हैं।

✍ पोषक गाय के दूध पर बछड़े को पालना
१) 2 से 4 अनाथ बछड़ों को दूध पिलाने के लिए उनकी उम्र के पहले सप्ताह से ही कम वसा-युक्त दूध देने वाली और दुहने में मुश्किल करने वाली गाय को सफलतापूर्वक तैयार किया जा सकता है।

२) सूखी घास के साथ बछड़े को सूखा आहार जितनी कम उम्र में देना शुरू किया जाए उतना अच्छा। इन बछड़ों का 2 से 3 महीने की उम्र में दूध छुड़वाया जा सकता है।

✍बछड़े को दलिए पर पालना
१) बछड़े के आरंभिक आहार (काफ स्टार्टर) का तरल रूप है दलिया। यह दूध का विकल्प नहीं है। 4 सप्ताह की उम्र से बछड़े के लिए दूध की मात्रा धीरे-धीरे कम कर भोजन के रूप में दलिया को उसकी जगह पर शामिल किया जा सकता है। 20 दिनों के बाद बछड़े को दूध देना पूरी तरह बंद किया जा सकता है।

✍काफ स्टार्टर पर बछड़े को पालना
१) इसमें बछड़े को पूर्ण दुग्ध के साथ स्टार्टर दिया जाता है। उन्हें सूखा काफ स्टार्टर और अच्छी सूखी घास या चारा खाने की आदत लगाई जाती है। 7 से 10 सप्ताह की उम्र में बछड़े का दूध पूरी तरह छुड़वा दिया जाता है।

✍दूध के विकल्पों पर बछड़े को पालना
✡ यह अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि नवजात बछड़े के लिए पोषकीय महत्व की दृष्टि से दूध का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, दूध के विकल्प का सहारा उस स्थिति में लिया जा सकता है जब दूध अथवा अन्य तरल पदार्थों की उपलब्धता बिल्कुल पर्याप्त न हो।
दूध के विकल्प ठीक उसी मात्रा में दिए जा सकते हैं जिस मात्रा में पूर्ण दुग्ध दिया जाता है, अर्थात् पुनर्गठन के बाद बछड़े के शारीरिक वजन का 10%। पुनर्गठित दूध के विकल्प में कुल ठोस की मात्रा तरल पदार्थ के 10 से 12% तक होती है।

✍दूध छुड़वाना
१) बछड़े का दूध छुड़वाना सघन डेयरी फार्मिंग व्यवस्था के लिए अपनाया गया एक प्रबन्धन कार्य है। बछड़े का दूध छुड़वाना प्रबन्धन में एकरूपता लाने में मदद करता है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक बछड़े को उसकी आवश्यकता अनुसार दूध की मात्रा उपलब्ध हो और दूध की बर्बादी अथवा दूध का आवश्यकता से अधिक पान न हो।

२) अपनाई गई प्रबन्धन व्यवस्था के आधार पर जन्म के समय, 3 सप्ताह बाद, 8 से 12 सप्ताह के दौरान अथवा 24 सप्ताह में दूध छुड़वाया जा सकता है। जिन बछड़ों को सांड के रूप में तैयार करना है उन्हें 6 महीने की उम्र तक दूध पीने के लिए मां के साथ छोड़ा जा सकता है।

3) संगठित रेवड़ में, जहां बड़ी संख्या में बछड़ों का पालन किया जाता है जन्म के बाद दूध छुड़ाना लाभदायक होता है।

४) जन्म के बाद दूध छुड़वाने से छोटी उम्र में दूध के विकल्प और आहार अपनाने में सहूलियत होती है और इसका यह फायदा है कि गाय का दूध अधिक मात्रा में मनुष्य के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होता है।

✍दूध छुड़वाने के
दूध छुड़वाने के बाद 3 महीने तक काफ स्टार्टर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जानी चाहिए। अच्छे किस्म की सूखी घास बछड़े को सारा दिन खाने को देना चाहिए। बछड़े के वजन के 3% तक उच्च नमी वाले आहार जैसे साइलेज़, हरा चारा और चराई के रूप में घास खिलाई जानी चाहिए। बछड़ा इनको अधिक मात्रा में न खा ले इसका ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसके कारण कुल पोषण की प्राप्ति सीमित हो सकती है।

✍बछड़े की बृद्धि
१) बछड़े की वृद्धि वांछित गति से हो रही है या नहीं इसे निर्धारित करने के लिए वजन की जांच करें।

२) पहले 3 महीनों के दौरान बछड़े का आहार बहुत महत्वपूर्ण होता है।

३) इस चरण में बछड़े का खानपान अगर सही न हो तो मृत्यु दर में 25 से 30% की वृद्धि होती है।

४) गर्भवती गाय को गर्भावस्था के अंतिम 2-3 महीनों के दौरान अच्छे किस्म का चारा और सांद्र आहार दिया जाना चाहिए।

५) जन्म के समय बछड़े का वजन 20 से 25 किग्रा होना चाहिए।

६) नियमित रूप से कृमिनाशक दवाई दिए जाने के साथ-साथ उचित आहार दिए जाने से बछड़े की वृद्धि दर 10-15 किग्रा प्रति माह हो सकती है।

✍बछड़े को स्वस्थ रखाना
नवजात बछड़ों को बीमारियों से बचाकर रखना उनकी आरंभिक वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे उनकी मृत्यु दर कम होती है, साथ ही बीमारी से बचाव बीमारी के इलाज की तुलना में कम खर्च में किया जा सकता है। बछड़े का नियमित निरीक्षण करें, उन्हें ठीक तरह से खिलाएं और उनके रहने की जगह और परिवेश को स्वच्छ रखें।

Tuesday, October 2, 2018

अक्टूबर माह में बुआई की जाने वाली फसले।


गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, कोहीराबी, धनिया, सौंफ के बीज, राजमा, मटर, ब्रोकोली, सलाद, बैंगन, हरी प्याज, ब्रसल्स स्प्राउट, लहसुन. इत्यादि।